उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aariz ashkon se tere tar nahin dekhe jate

आरिज़ अश्कों से तिरे तर नहीं देखे जाते

عارض اشکوں سے ترے تر نہیں دیکھے جاتے

शायर: JaiKrishn Chaudhry Habeeb9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

आरिज़ अश्कों से तिरे तर नहीं देखे जाते
ख़ाक में रूलते ये गौहर नहीं देखे जाते

देख सकता हूँ ज़माने की बदलती नज़रें
तेरे बदले हुए तेवर नहीं देखे जाते

आइना भी रुख़-ए-रौशन के मुक़ाबिल न रहे
हम से कोई तिरे हम-सर नहीं देखे जाते

दिल के सागर में जो हर शाम-ओ-सहर उठते हैं
वो तलातुम कभी बाहर नहीं देखे जाते

मुस्कुराते हुए चेहरे पे नज़र सब की पड़ी
ज़ख़्म दिल के मगर अक्सर नहीं देखे जाते

हुस्न के जल्वे जो देखे तिरे दीवाने ने
होश वालों से वो अक्सर नहीं देखे जाते

क़द्र कर क़द्र मिरे ज़ौक़-ए-नज़र की साक़ी
सब हसीं यूँ तो मुकर्रर नहीं देखे जाते

मै-कदा अपना है और बादा-ओ-साक़ी अपने
ग़ैर के हाथ में साग़र नहीं देखे जाते

ये हसीं वादी-ओ-दरिया गुल-ओ-गुलज़ार 'हबीब'
बिन तिरे मुझ से ये मंज़र नहीं देखे जाते