उर्दू शायरी · ग़ज़ल

yun tabassum-rez hai dil chashm-e-KHandan dekh kar

यूँ तबस्सुम-रेज़ है दिल चश्म-ए-ख़ंदाँ देख कर

یوں تبسم ریز ہے دل چشم خنداں دیکھ کر

शायर: Habeeb Ahmad Siddiqui7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

यूँ तबस्सुम-रेज़ है दिल चश्म-ए-ख़ंदाँ देख कर
जैसे दरिया मुस्कुराए माह-ए-ताबाँ देख कर

बारगाह-ए-नाज़ में सर को झुकाना ही पड़ा
हुस्न की रंगीनियों को जुज़्व-ए-ईमाँ देख कर

इन बुतों के इश्वा-ए-रंगीं की रंगीं शोख़ियाँ
इल्तिफ़ात-ए-ख़ास है मुझ को मुसलमाँ देख कर

गो न थे ना-आश्ना-ए-रस्म-ओ-राह-ए-दिलबरी
फिर भी हम खोए गए चश्म-ए-पशेमाँ देख कर

ज़िंदगी में क़ुव्वत-ए-बालीदगी आती गई
हर अदा-ए-हुस्न में इक राज़ पिन्हाँ देख कर

हुस्न की मा'सूमियत से दिल को है उम्मीद-ए-लुत्फ़
ज़ेर-ए-लब ख़ंदाँ है कोई दिल का अरमाँ देख कर

बे-दिली ने तोड़ डाले रंग-ओ-बू के सब तिलिस्म
क्या करे कोई बहार-ए-सद-गुलिस्ताँ देख कर