उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dil hai to magar dil mein wo jazbaat nahin ab

दिल है तो मगर दिल में वो जज़्बात नहीं अब

دل ہے تو مگر دل میں وہ جذبات نہیں اب

शायर: Habeeb Ahmad Siddiqui7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दिल है तो मगर दिल में वो जज़्बात नहीं अब
इक साज़ है जो हामिल-ए-नग़्मात नहीं अब

वो सिलसिला-ए-हर्फ़-ओ-हिकायात नहीं अब
मिलते हैं मगर लुत्फ़-ए-मुलाक़ात नहीं अब

दर-पर्दा इशारात-ओ-किनायात नहीं अब
या'नी नज़र-अफ़रोज़ हिजाबात नहीं अब

मिलने को तो मिलती हैं निगाहों से निगाहें
वो लुत्फ़-ए-सवालात-ओ-जवाबात नहीं अब

अब शाम-ओ-सहर में नहीं बे-ताबी-ए-फ़ितरत
आशोब-ए-तमन्ना लिए दिन-रात नहीं अब

सहबा-ए-तरब कौन पिए कौन पिलाए
वो रिंद वो साक़ी वो ख़राबात नहीं अब

सब उठ गए ख़ुश-रंग हिजाबात नज़र से
दुनिया मिरी नज़रों में तिलिस्मात नहीं अब