उर्दू शायरी · ग़ज़ल

bhula dene walon ki yaad aa rahi hai

भुला देने वालों की याद आ रही है

بھلا دینے والوں کی یاد آ رہی ہے

शायर: Habeeb Ahmad Siddiqui9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

भुला देने वालों की याद आ रही है
भुलाए हुए ख़्वाब दिखला रही है

अज़िय्यत में राहत ख़लिश में सुकूँ है
तबीअत अजब लज़्ज़तें पा रही है

तसव्वुर में वो ज़ुल्फ़-ए-मुश्कीं बसी है
मोअ'त्तर मोअ'त्तर सबा आ रही है

मिरे वास्ते ग़ुंचा-ए-जाँ-फ़ज़ा में
तबस्सुम की शोख़ी भरी जा रही है

बहक कर भटक कर निगाहें बचा कर
मिरे दिल की जानिब नज़र आ रही है

ज़बाँ के तवस्सुत से आज़ाद हो कर
हदीस-ए-तमन्ना कही जा रही है

ये मेरी तमन्ना की गुल-कारियाँ हैं
कि फूलों से दुनिया पटी जा रही है

जवानी में उल्फ़त की हल्क़ा-ब-गोशी
ये रस्म-ए-कुहन तो चली जा रही है

मोहब्बत को दीवानगी जानते हैं
मोहब्बत मगर फिर भी की जा रही है