उर्दू शायरी · ग़ज़ल

yun mera ashk bahana bhi ek bahana laga

यूँ मेरा अश्क बहाना भी इक बहाना लगा

یوں میرا اشک بہانا بھی اک بہانہ لگا

शायर: Mahboob Mashmiri6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

यूँ मेरा अश्क बहाना भी इक बहाना लगा
कि मेरा सच तो उसे झूट का फ़साना लगा

वो इक क़दम पे ही आँखों से हो गया ओझल
मैं जस्त भर के उड़ा और मुझे ज़माना लगा

मुझे न रो ये ख़सारा नहीं कुछ और है दोस्त
सवाद-ए-इश्क़ में मैं क्या मिरा घराना लगा

वो अब मज़ार पे बैठा हुआ है मेरे लिए
उसे कहो मुझे जीने की बद-दुआ' न लगा

वो आइना था कि इक ज़ोर-दार क़हक़हा था
मुझे तो पहली नज़र में ही मैं दिवाना लगा

वो दूसरों की नज़र में ग़लत सही 'महबूब'
बुरी नज़र से भी देखा है तो बुरा न लगा