उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jaane ujlat mein kya hua tha mujhe

जाने उजलत में क्या हुआ था मुझे

جانے عجلت میں کیا ہوا تھا مجھے

शायर: Mahboob Mashmiri7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जाने उजलत में क्या हुआ था मुझे
मशवरा देर से मिला था मुझे

साज़िशें हो रही हैं मेरे ख़िलाफ़
सच में ऐसा ही लग रहा था मुझे

अब जो मैं सोचता हूँ बैठा हुआ
ये तो पहले ही सोचना था मुझे

अक्स पर फेंकता था क़हक़हा मैं
अक्स रो-रो के देखता था मुझे

बे-हिसी भी कोई इलाज नहीं
इस का एहसास हो चुका था मुझे

उस ने वापस ज़रूर कर दिया दिल
हाँ मगर तोड़ कर दिया था मुझे

मैं अकेला था अपने लश्कर में
भाग जाने में फ़ाएदा था मुझे