उर्दू शायरी · ग़ज़ल

KHud kahani ko aisa moD diya

ख़ुद कहानी को ऐसा मोड़ दिया

خود کہانی کو ایسا موڑ دیا

शायर: Mahboob Mashmiri7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ख़ुद कहानी को ऐसा मोड़ दिया
आख़िरी अश्क तक निचोड़ दिया

कैसी अच्छी है उस की तन्हाई
आदमी को ख़ुदा ने छोड़ दिया

उस ने पानी पे मेरा नाम लिखा
जैसे कूज़ा बना के तोड़ दिया

दिल बना कर मिरा हथेली पर
और फिर मुट्ठी को मरोड़ दिया

हम बहुत लम्बी लम्बी छोड़ते थे
जभी इक दूसरे को छोड़ दिया

दश्त की प्यास का यही हल था
पाँव के आबले को फोड़ दिया

अक्स फिर एक हो नहीं पाए
टूटे आईने को तो जोड़ दिया