उर्दू शायरी · ग़ज़ल

din mein sote hain raat jagte hain

दिन में सोते हैं रात जागते हैं

دن میں سوتے ہیں رات جاگتے ہیں

शायर: Mahboob Mashmiri5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दिन में सोते हैं रात जागते हैं
हम चराग़ों के सात जागते हैं

उस के बिस्तर से लम्स चुनते हुए
नींद सोती है हाथ जागते हैं

नींद में हैं मुसाफ़िरान-ए-किराम
ख़्वाब में पुल-सिरात जागते हैं

दर्द हैं ला-ज़वाल-ओ-पज़मुर्दा
ज़ख़्म हैं बे-सबात जागते हैं

दिल को यकसूई चाहिए 'महबूब'
ज़ेहन में शश-जिहात जागते हैं