उर्दू शायरी · ग़ज़ल

yun kam-nasibiyon ka badal chahiye hamein

यूँ कम-नसीबियों का बदल चाहिए हमें

یوں کم نصیبیوں کا بدل چاہیے ہمیں

शायर: Ghalib Duraib4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

यूँ कम-नसीबियों का बदल चाहिए हमें
सूखे हुए शजर से भी फल चाहिए हमें

छोटी सी एक झोंपड़ी जिन को नहीं नसीब
कहते हैं वो भी शीश महल चाहिए हमें

बार-ए-ग़म-ए-हयात ने ऐसा किया है हाल
घबरा के कह रहे हैं अजल चाहिए हमें

इस बार किस अदा से मिलेगी वो देखना
वो जानती है जैसी ग़ज़ल चाहिए हमें