उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ghalat karta hun to kahte hain achchha kar rahe hain

ग़लत करता हूँ तो कहते हैं अच्छा कर रहे हैं

غلط کرتا ہوں تو کہتے ہیں اچھا کر رہے ہیں

शायर: Ghalib Duraib9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ग़लत करता हूँ तो कहते हैं अच्छा कर रहे हैं
ये कहने के बजाए आप ये क्या कर रहे हैं

वगरना 'इश्क़ इतना बे-असर होता नहीं है
यूँ लगता है हमें ये काम बेजा कर रहे हैं

मोहब्बत से मुकरने वालों से पूछे तो कोई
कि किस के कहने पर ये लोग ऐसा कर रहे हैं

किसी की अब यहाँ पर कोई भी सुनता नहीं है
ग़नीमत है कि हम अब भी भरोसा कर रहे हैं

बहुत हँसते थे जब था इख़्तियार उस पर हमारा
और अब बस में नहीं है वो तो गिर्या कर रहे हैं

बहुत से और भी हैं 'इश्क़ के मारे यहाँ पर
नहीं ऐसा कि हम ये काम तन्हा कर रहे हैं

मोहब्बत 'इश्क़ वक़्ती उन्स चाहत और लगाओ
न जाने क्या है जो हम उस की पर्वा कर रहे हैं

हमें मा'लूम है मुमकिन नहीं पा लेना उस को
ये क्या कि फिर भी हम उस की तमन्ना कर रहे हैं

'दुरैब' आसान कब है ज़िंदगी इतनी वगरना
कोई तो बात है जो हम गुज़ारा कर रहे हैं