उर्दू शायरी · ग़ज़ल

nahin hai chaak gareban ab bhi baqi hai

नहीं है चाक गरेबान अब भी बाक़ी है

نہیں ہے چاک گریبان اب بھی باقی ہے

शायर: Ghalib Duraib6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

नहीं है चाक गरेबान अब भी बाक़ी है
कि होना 'इश्क़ में नुक़्सान अब भी बाक़ी है

कि जा चुकी है जहन्नुम बना के दुनिया मिरी
प मेरे दिल में वो शैतान अब भी बाक़ी है

नहीं हम इतनी सी शोहरत पे मुतमइन साहिब
कि मिस्र-ओ-शाम-ओ-खुरासान अब भी बाक़ी है

किवाड़ अभी न करो बंद शम' गुल न करो
कि उस के आने का इम्कान अब भी बाक़ी है

ये कोह-ए-'इश्क़ मगर सर न कर सकूँगा अब
अगरचे मुझ में बहुत जान अब भी बाक़ी है

ज़माना हो गया तुझ को मिरे 'दुरैब' मगर
तिरी ज़माने में पहचान अब भी बाक़ी है