उर्दू शायरी · ग़ज़ल

fasane jaan-nawardi ke raqam hote rahenge

फ़साने जाँ-नवर्दी के रक़म होते रहेंगे

فسانے جاں نوردی کے رقم ہوتے رہیں گے

शायर: Ghalib Duraib7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

फ़साने जाँ-नवर्दी के रक़म होते रहेंगे
सो हम जैसों के यूँही सर क़लम होते रहेंगे

तुम्हारा हिज्र मुरझा देगा हम जैसों को लेकिन
तुम्हारी याद से हम ताज़ा-दम होते रहेंगे

बहुत रोते रहेंगे हम भी उन की इक नज़र को
मगर औरों पे ही उन के करम होते रहेंगे

यूँही क़ाएम रहेगी रौनक़-ए-महफ़िल तुम्हारी
यूँही पैदा यहाँ पर अहल-ए-ग़म होते रहेंगे

यूँही करते रहेंगे रोज़-ओ-शब हम ग़म-गुसारी
ग़म-ए-दौराँ ग़म-ए-हिज्राँ बहम होते रहेंगे

तुम्हारी नाज़-बरदारी को यूँही शाहज़ादी
हम ऐसे शाहज़ादों के जनम होते रहेंगे

'दुरैब' इस महफ़िल-ए-दुनिया में कुछ हो या नहीं हो
हमारे तज़्किरे तो बेश-ओ-कम होते रहेंगे