उर्दू शायरी · ग़ज़ल

yun guzre chaman se ki gulistan nahin dekha

यूँ गुज़रे चमन से कि गुलिस्ताँ नहीं देखा

یوں گزرے چمن سے کہ گلستاں نہیں دیکھا

शायर: Panna Lal Noor4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

यूँ गुज़रे चमन से कि गुलिस्ताँ नहीं देखा
काँटों पे चले और बयाबाँ नहीं देखा

उस शम्अ' पे जलने को तड़पते हैं पतंगे
जिस शम्अ' को आँखों से फ़रोज़ाँ नहीं देखा

रक़्साँ है यहाँ नूर-ब-कफ़ जल्वा-ए-जानाँ
क्या तू ने अभी दीदा-ए-हैराँ नहीं देखा

होने को तो था 'नूर' के दिल में भी बड़ा दर्द
लेकिन कभी चेहरे से नुमायाँ नहीं देखा