उर्दू शायरी · ग़ज़ल

adu ke hath se main jam le kar pi nahin sakta

अदू के हाथ से मैं जाम ले कर पी नहीं सकता

عدو کے ہاتھ سے میں جام لے کر پی نہیں سکتا

शायर: Panna Lal Noor4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अदू के हाथ से मैं जाम ले कर पी नहीं सकता
किसी कम-ज़र्फ़ का एहसान ले कर जी नहीं सकता

कभी जी चाहता है नाम ले कर ज़ोर से चीख़ूँ
न जाने नाम क्यों ज़ालिम का फिर ले भी नहीं सकता

मिरे दिल ने ज़माने में कुछ इतने ज़ख़्म खाए हैं
मसीहा भी दिल-ए-सद-चाक को अब सी नहीं सकता

मिरी तिश्ना-लबी पर 'नूर' ये भी तंज़-ए-साक़ी है
भरे हैं हर तरफ़ जाम-ओ-सुबू और पी नहीं सकता