उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ham-safar hai na ham-nawa koi

हम-सफ़र है न हम-नवा कोई

ہم سفر ہے نہ ہم نوا کوئی

शायर: Panna Lal Noor8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हम-सफ़र है न हम-नवा कोई
होगा हम सा शिकस्ता-पा कोई

इक नज़र क्या मिला गया कोई
इक क़यामत उठा गया कोई

देखो नज़रें चुरा के मत जाओ
तुम को कह दे न बेवफ़ा कोई

दर्द देते हो दो मगर ऐसा
जिस की फिर हो न इंतिहा कोई

जिस रह-ए-इश्क़ पर चला हूँ मैं
इब्तिदा है न इंतिहा कोई

सर तो ख़ुद झुक गया है सज्दे में
जब तसव्वुर में आ गया कोई

मुझ को सज्दों से कुछ गुरेज़ नहीं
हो न जाए मगर ख़ुदा कोई

मैं बताऊँगा मंज़िलों का पता
मुझ से पूछे तो रास्ता कोई