उर्दू शायरी · ग़ज़ल

yun bazahir muskura kar har hasin paikar mila

यूँ बज़ाहिर मुस्कुरा कर हर हसीं पैकर मिला

یوں بظاہر مسکرا کر ہر حسیں پیکر ملا

शायर: Qamar Siddiqui7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

यूँ बज़ाहिर मुस्कुरा कर हर हसीं पैकर मिला
पर छुपाए आस्तीं में अपने इक ख़ंजर मिला

जाने किस का कर रहा है मुद्दतों से इंतिज़ार
वो जो इक साया गली के मोड़ पर अक्सर मिला

दिल न मिल पाया कभी हम ख़ुद न पहचाने कभी
वर्ना मिलने को तो हम से वो हसीं अक्सर मिला

लोग कहते हैं समुंदर में जवाहिर हैं बहुत
मैं ने तो जब भी खंगाला मुझ को इक पत्थर मिला

हम तो समझे थे भुला बैठे उन्हें कब का मगर
ख़्वाब की दुनिया में भी यादों का इक लश्कर मिला

वाए-नाकामी कि निकला रहज़न-ए-मंज़िल वही
हम समझते थे कि हम को ख़िज़्र सा रहबर मिला

क्यों न छा जाए उदासी ज़ेहन-ए-इंसाँ पर 'क़मर'
दर्द के कोहरे में लिपटा हर हसीं मंज़र मिला