उर्दू शायरी · ग़ज़ल

har taraf shola aasman mein tha

हर तरफ़ शो'ला आसमान में था

ہر طرف شعلہ آسمان میں تھا

शायर: Qamar Siddiqui7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हर तरफ़ शो'ला आसमान में था
मौत का ख़ौफ़ हर मकान में था

मेरी हर बात उस को चुभती थी
कोई काँटा मिरी ज़बान में था

अपना घर छोड़ कर वो क्यों भागे
जाने क्या सेहर उस निशान में था

पस्तियाँ क्यों उसे नसीब हुईं
जो बशर पहले आसमान में था

हर परिंदा गया सू-ए-अफ़्लाक
क्या मज़ा दोस्तो उड़ान में था

ख़ून-ए-नाहक़ से आश्ना ही न था
तीर जब तक मिरी कमान में था

हम 'क़मर' इस तरह से बिछड़ेंगे
क्या कभी ये तिरे गुमान में था