उर्दू शायरी · ग़ज़ल

haq bolne walon ke taraf-dar hue kyon

हक़ बोलने वालों के तरफ़-दार हुए क्यों

حق بولنے والوں کے طرف دار ہوئے کیوں

शायर: Qamar Siddiqui5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हक़ बोलने वालों के तरफ़-दार हुए क्यों
इस दौर में हम साहब-ए-किरदार हुए क्यों

जो अपनी हर इक बात पे शक करने लगा है
हम उस की मोहब्बत में गिरफ़्तार हुए क्यों

इस शहर के हर शख़्स से कह दो कि ये सोचे
क्यों पेश-ए-नज़र थे पस-ए-दीवार हुए क्यों

जब सब ही यहाँ लाइक़-ए-गर्दन-ज़दनी हैं
फिर तुम ही कहो हम ही ख़ता-वार हुए क्यूँ

ये बात 'क़मर' हम को समझ में नहीं आती
इक हम ही निशाना तिरा हर बार हुए क्यों