उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ho sake tum se to shishe ki tarah dil pighlao

हो सके तुम से तो शीशे की तरह दिल पिघलाओ

ہو سکے تم سے تو شیشے کی طرح دل پگھلاؤ

शायर: Qamar Siddiqui7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हो सके तुम से तो शीशे की तरह दिल पिघलाओ
और अगर ये भी न मुमकिन हो तो पत्थर बन जाओ

फिक्र-ओ-एहसास के शो'लों में जला जाता हूँ
तुम भी जल जाओगे यारो मिरे नज़दीक न आओ

मंज़िल-ए-'इश्क़ को आसान समझने वालो
दो क़दम ही दर-ए-जानाँ की तरफ़ चल के दिखाओ

शौक़ से तोड़ो अगर राह में हैं शीश-महल
मेरे फ़ानूस-ए-तख़य्युल पे न पत्थर बरसाओ

इन दिनों छाए फ़ज़ाओं पे हैं काले बादल
ऐसी मायूसी में उम्मीद के कुछ दीप जलाओ

शब-ए-तारीक में चमके कोई जुगनू जैसे
इतना बाक़ी है अभी दिल से तमन्ना का लगाव

'इश्क़ ही 'इश्क़ नज़र आएगा हर सम्त 'क़मर'
भूल कर सारे ज़माने को सर-ए-दार तो आओ