उर्दू शायरी · ग़ज़ल

yun baras paDte hain kya aise wafadaron par

यूँ बरस पड़ते हैं क्या ऐसे वफ़ादारों पर

یوں برس پڑتے ہیں کیا ایسے وفاداروں پر

शायर: Dagh Dehlvi4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

यूँ बरस पड़ते हैं क्या ऐसे वफ़ादारों पर
रख लिया तू ने तो उश्शाक़ को तलवारों पर

मोहतसिब तोड़ के शीशा न बहा मुफ़्त शराब
अरे कम-बख़्त छिड़क दे इसे मय-ख़्वारों पर

आशिक़ आए हैं कि दीवानों का लश्कर आया
क्या चढ़ाई है तिरे कूचे की दीवारों पर

'दाग़' का इश्क़ भी दुनिया से निराला देखा
दिल जब आता है तो आता है दिल-आज़ारों पर