उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ye zindagi hayat-numa ho to baat hai

ये ज़िंदगी हयात-नुमा हो तो बात है

یہ زندگی حیات نما ہو تو بات ہے

शायर: Kailash Mahir7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ये ज़िंदगी हयात-नुमा हो तो बात है
ग़म ही ब-क़द्र-ए-ज़र्फ़ मिला हो तो बात है

शो'ला-फ़िशानियाँ भी तिरे इश्क़ तक रहें
इस दिल से फिर धुआँ भी उठा हो तो बात है

रंग-ए-ज़माना देख के तर्क-ए-वफ़ा सही
दिल से तिरा ख़याल गया हो तो बात है

आसूदगान-ए-ग़म की ख़िज़ाँ क्या बहार क्या
दिल में कोई भी ज़ख़्म खुला हो तो बात है

अहल-ए-जुनूँ ज़माने में रुस्वा हुए तो क्या
तू ने भी वो फ़साना सुना हो तो बात है

शिकवा तिरे तग़ाफ़ुल-ए-पैहम का क्या करें
अपना भी ए'तिबार किया हो तो बात है

'माहिर' है ख़िज़्र से भी सिवा गुमरही-पसंद
तुझ सा हसीन राह-नुमा हो तो बात है