उर्दू शायरी · ग़ज़ल

apna dukh kaise jatlayen

अपना दुख कैसे जतलाएँ

اپنا دکھ کیسے جتلائیں

शायर: Kailash Mahir7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अपना दुख कैसे जतलाएँ
नक़ली चेहरा कैसे दिखाएँ

लम्स-ए-हवा से जी बहलाएँ
उन का क्या है आएँ न आएँ

तुझ से अपनी यारी छूटी
बीते दिनों का जश्न मनाएँ

उजले बदन की बात ही कुछ थी
काग़ज़ पर क्या मुहर लगाएँ

दैर-ओ-हरम में सन्नाटा है
और कहाँ आवाज़ लगाएँ

दिन तो कॉफ़ी-होम में गुज़रा
रात हुई किस के घर जाएँ

इतना वक़्त कहाँ अब 'माहिर'
कोई नया महबूब बनाएँ