उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ham-nawa milta to aawaz ka sauda karte

हम-नवा मिलता तो आवाज़ का सौदा करते

ہم نوا ملتا تو آواز کا سودا کرتے

शायर: Kailash Mahir6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हम-नवा मिलता तो आवाज़ का सौदा करते
हम कहाँ आ गए परछाईं का पीछा करते

रंग-ओ-बू ज़ेहन की दीवार बने हैं वर्ना
तेरी तस्वीर बनाते तिरी पूजा करते

दिन से दिन होते न ये रात सी रातें होतीं
किसी हमदर्द से जो दर्द का रिश्ता करते

कोई ग़म पाँव की ज़ंजीर कहाँ तक होगा
जोगिया पहन के बाज़ार में घूमा करते

ये भी क्या कम है तिरे नाम पे जीते हैं अभी
होंट जल जाते अगर हम कोई शिकवा करते

कोई खंडर कोई गिरती हुई दीवार सही
कट गई उम्र यहाँ जिस्म को साया करते