उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ye zamin KHamosh hai ye aasman KHamosh hai

ये ज़मीं ख़ामोश है ये आसमाँ ख़ामोश है

یہ زمیں خاموش ہے یہ آسماں خاموش ہے

शायर: Yasir Guman7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ये ज़मीं ख़ामोश है ये आसमाँ ख़ामोश है
इक तिरी आवाज़ सुनने को जहाँ ख़ामोश है

तीरगी के दश्त में सूरज-मुखी खिलता नहीं
वहशतों के शोर से 'उम्र-ए-रवाँ ख़ामोश है

जब से तेरी याद के घर से निकलने का सुना
तब से रंजीदा हैं दीवारें मकाँ ख़ामोश है

बेवफ़ा तेरी अदा ने यूँ कराया चुप मुझे
शोर है अब दिल में पर मेरी ज़बाँ ख़ामोश है

ग़ैर-फ़ितरी मंज़रों ने घेर रक्खा है मुझे
भूक से रोते हुए बच्चे की माँ ख़ामोश है

आज मेरे मुल्क के हालात ऐसे हो गए
अपनी बर्बादी-ए-क़िस्मत पर जवाँ ख़ामोश है

आप की महफ़िल में तोहमत लग गई है इस लिए
मेरे हक़ में जो लिखा था वो बयाँ ख़ामोश है