उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ye unch-nich sabhi zindagi mein shamil hai

ये ऊँच-नीच सभी ज़िंदगी में शामिल है

یہ اونچ نیچ سبھی زندگی میں شامل ہے

शायर: Zafar Iqbal6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ये ऊँच-नीच सभी ज़िंदगी में शामिल है
किसी से दूर है दुनिया किसी में शामिल है

वही था सब से नुमायाँ तमाम लोगों में
जो एक रंग तिरी सादगी में शामिल था

छुपी रहेगी अभी और सात पर्दों में
वो दिल-बरी जो तिरी बे-रुख़ी में शामिल है

इसी लिए निकल आते हैं अक्सर आँसू भी
इक और चीज़ भी है जो ख़ुशी में शामिल है

कोई लगाए सुराग़ आ के इस अंधेरे का
जो चमचमाती हुई रौशनी में शामिल है

दर-अस्ल वो कहीं मौजूद ही नहीं थी 'ज़फ़र'
वो एक शय जो मिरी शा'इरी में शामिल है