उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ye siyasat fasadat ki aur kab tak rachi jaegi

ये सियासत फ़सादात की और कब तक रची जाएगी

یہ سیاست فسادات کی اور کب تک رچی جائے گی

शायर: Naeem Akhtar Khadimi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ये सियासत फ़सादात की और कब तक रची जाएगी
हम को बे-बस किया जाएगा उन को तलवार दी जाएगी

ऐ मिरे वक़्त के मुंसिफ़ो कुछ तो अपनी ज़बाँ से कहो
मेरे अस्लाफ़ की ये ज़मीं कब मिरे नाम की जाएगी

इर्तिक़ा के सभी रास्ते बंद पहले किए जाएँगे
बा'द में सारी पसमांदगी हम से मंसूब की जाएगी

वो अधूरी कहानी मिरी जिस का 'उन्वान तुम थे कभी
मुझ से कैसे कही जाएगी जब न तुम से सुनी जाएगी

दौलत-ए-सीम-ओ-ज़र पे 'न'ईम' इस क़दर भी न मग़रूर हो
ये भी इक बेसवा की तरह आज है कल चली जाएगी