उर्दू शायरी · ग़ज़ल

KHulus-e-dost bhi dushman ke pyar jaisa hai

ख़ुलूस-ए-दोस्त भी दुश्मन के प्यार जैसा है

خلوص دوست بھی دشمن کے پیار جیسا ہے

शायर: Naeem Akhtar Khadimi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ख़ुलूस-ए-दोस्त भी दुश्मन के प्यार जैसा है
लतीफ़ लहजा भी ख़ंजर की धार जैसा है

न घर में चैन न बाहर क़रार जैसा है
ज़रूर मुझ में कोई इंतिशार जैसा है

अभी तो बाक़ी है ज़ख़्मों की आइना-दारी
अभी से हाल तिरा शर्मसार जैसा है

न जाने कौन-सी मंज़िल के ये मुसाफ़िर हैं
कोई हवा कोई गर्द-ओ-ग़ुबार जैसा है

रहेगा मंसब-ए-दीवानगी ये कितने दिन
जुनूँ के ज़ो'म में जो होश्यार जैसा है

मुझे ब-नाम-ए-मुहाजिर पुकारता है 'न'ईम'
ब-ज़ात-ए-ख़ुद जो ग़रीब-उद-दयार जैसा है