उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kaha ye kis ne ki chehra naya lagao mat

कहा ये किस ने कि चेहरा नया लगाओ मत

کہا یہ کس نے کہ چہرہ نیا لگاؤ مت

शायर: Naeem Akhtar Khadimi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कहा ये किस ने कि चेहरा नया लगाओ मत
इसे लगा के मगर आइनों में आओ मत

लगा दिए हैं किसी ने जो पंख काग़ज़ के
तो अपने आप को इतना मियाँ उड़ाओ मत

कहीं ये दायरा-ए-तंज़ में न आ जाए
हमारे सामने इस तरह मुस्कुराओ मत

'अजब नहीं कि ये दुनिया गले में आ जाए
बहुत ज़ियादा गले से इसे लगाओ मत

निकाले और ही मतलब वो ख़ाकसारी का
अब उस के सामने इतना भी सर झुकाओ मत

अभी अभी तो वो कुछ बोलने पे आया है
'न'ईम' अभी से उसे आइना दिखाओ मत