उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dil ko yun dard-e-mir khinchta hai

दिल को यूँ दर्द-ए-मीर खींचता है

دل کو یوں درد میر کھینچتا ہے

शायर: Naeem Akhtar Khadimi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दिल को यूँ दर्द-ए-मीर खींचता है
कश्फ़ जैसे फ़क़ीर खींचता है

मुझ पे तोहमत उछालने वाला
आइने पर लकीर खींचता है

ख़ुद निशाना चला है तीर के पास
या निशाने को तीर खींचता है

जब भी करता हूँ ज़र्फ का सौदा
मुझ को मेरा ज़मीर खींचता है

दस्त-ए-मुफ़्लिस तो ना-तवाँ है 'न'ईम'
माल-ओ-ज़र तो अमीर खींचता है