उर्दू शायरी · ग़ज़ल

abhi bana bhi na tha sham’-dan kaghaz par

अभी बना भी न था शम’-दान काग़ज़ पर

ابھی بنا بھی نہ تھا شمع دان کاغذ پر

शायर: Naeem Akhtar Khadimi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अभी बना भी न था शम’-दान काग़ज़ पर
पतंगे आ गए देने को जान काग़ज़ पर

मिरी लिखाई पे मश्कूक है अगर दुनिया
तो आ के ले ले मिरा इम्तिहान काग़ज़ पर

उठा ग़ुबार-ए-त'अस्सुब कई लकीरों से
बना रहा था मैं हिन्दोस्तान काग़ज़ पर

ज़रा सी 'उम्र में ऊँची उड़ान भरने को
बनाता रहता है वो आसमान काग़ज़ पर

लिया दिया हुआ दिल में हिसाब रखते हैं
हम अहल-ए-दिल नहीं करते जुड़ान काग़ज़ पर

'न'ईम' एक नए शे'र के तजस्सुस में
कभी कभी तो खिंच आती है जान काग़ज़ पर