उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ye safed safhon ke hans hain inhen raushnai pe chhoD lun

ये सफ़ेद सफ़्हों के हंस हैं इन्हें रौशनाई पे छोड़ लूँ

یہ سفید صفحوں کے ہنس ہیں انہیں روشنائی پہ چھوڑ لوں

शायर: Lucky farooqi Hasrat5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ये सफ़ेद सफ़्हों के हंस हैं इन्हें रौशनाई पे छोड़ लूँ
मैं ख़याल-ओ-फ़िक्र की झील से कोई रब्त-ए-बाहमी जोड़ लूँ

हो सियाह शब तिरा इज़्न गर तो नशीले होंटों की नोक से
मैं गुलाबी चाँद की मरमरीं से पहाड़ियों को झिंझोड़ लूँ

ये इनायतों के बबूल का हरा काँटा मेरी तलब नहीं
मिरे आबले बड़े नर्म हैं इन्हें सूखी घास पे फोड़ लूँ

मिरी तिश्नगी को नसीब हो तिरी क़ुर्बतों की शराब गर
मैं बदन के ख़ाली गिलास में तिरा रंग-रूप निचोड़ लूँ

ज़रा बाग़बाँ की नज़र हटे तो मैं उँगलियों से विसाल की
तिरे तन की साँवली बेल से कई फूल बोसे के तोड़ लूँ