उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dariya-e-fikr-e-nau ki rawani mein gir gaya

दरिया-ए-फ़िक्र-ए-नौ की रवानी में गिर गया

دریائے فکر نو کی روانی میں گر گیا

शायर: Lucky farooqi Hasrat6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दरिया-ए-फ़िक्र-ए-नौ की रवानी में गिर गया
सूरज फिसल के बर्फ़ के पानी में गिर गया

जिस ने छुआ था मिसरा-ए-अव्वल में आसमान
वो शे'र आ के मिस्रा-ए-सानी में गिर गया

गंगा में बहती राख है इस बात की गवाह
बरगद का पेड़ टूट के पानी में गिर गया

रहज़न ने कुछ तो लूट लिया रख़्त-ए-ज़िंदगी
जो कुछ बचा था नक़्ल-ए-मकानी में गिर गया

न ज़लज़ला कोई न कोई और सानेहा
ऐवान-ए-रब्त तल्ख़-बयानी में गिर गया

जिस आइने में देख के सजती थीं तितलियाँ
वो आइना भी बाद-ए-ख़िज़ानी में गिर गया