उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ye sath duniya ke chal rahi hai

ये साथ दुनिया के चल रही है

یہ ساتھ دنیا کے چل رہی ہے

शायर: Taj Muhammad Siddiqui6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ये साथ दुनिया के चल रही है
ग़ज़ल भी लहजा बदल रही है

ये सिंफ़-ए-नाज़ुक है रब की ने'मत
जिसे ये दुनिया मसल रही है

है ज़िंदगी बर्फ़ ही के जैसी
जो रफ़्ता रफ़्ता पिघल रही है

तो क्या सियासत में जा रहे हो
ज़बाँ जो इतनी फिसल रही है

जलन भरी है जो ज़ह्न में वो
ग़ुबार बन कर निकल रही है

है जिस हुकूमत पे नाज़ तुम को
हमारी लौंडी वो कल रही है