उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kisi ne KHat mein mere dost hai likha mujhko

किसी ने ख़त में मेरे दोस्त है लिखा मुझ को

کسی نے خط میں میرے دوست ہے لکھا مجھ کو

शायर: Taj Muhammad Siddiqui5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

किसी ने ख़त में मेरे दोस्त है लिखा मुझ को
तुम अपने आप से करना नहीं जुदा मुझ को

नज़र में अपने ही मैं आज गिरने वाला था
ख़ुदा का शुक्र है उस ने बचा लिया मुझ को

भटक रहा हूँ ज़माने में दर-ब-दर कब से
कोई दिखा दे ज़रा अब तो रास्ता मुझ को

दवा से तेरी नहीं फ़ाएदा हुआ कुछ भी
दु'आ के ज़रिए ही देगा शिफ़ा ख़ुदा मुझ को

समझ रहा है सितमगर न जाने क्या मुझ को
दिखा रहा है ज़माना जो आइना मुझ को