उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mohabbat ka miyan apna alag dastur hota hai

मोहब्बत का मियाँ अपना अलग दस्तूर होता है

محبت کا میاں اپنا الگ دستور ہوتا ہے

शायर: Taj Muhammad Siddiqui6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मोहब्बत का मियाँ अपना अलग दस्तूर होता है
यहाँ मा'शूक़ का हर फ़ैसला मंज़ूर होता है

पिलाता है तू क्यों पीर-ए-मुग़ाँ हम को सुराही से
तू देखे गर नज़र-भर के तो दिल मख़मूर होता है

भले कामों से कल तक आदमी मशहूर होता था
बुरे कामों से इंसाँ आज-कल मशहूर होता है

यही सब देखते सुनते ज़'ईफ़ी आ गई मुझ पर
हुकूमत में जो होता है बहुत मग़रूर होता है

जिसे देखो उठाए फिर रहा है लाश ख़ुद अपनी
यहाँ हर आदमी पैदाइशी मज़दूर होता है

सुनो ऐ 'ताज' इंसाँ चाहे जितनी कोशिशें कर ले
वही होता है जो रब को मिरे मंज़ूर होता है