उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kyon doston ki bazm mein aate nahin ho tum

क्यों दोस्तों की बज़्म में आते नहीं हो तुम

کیوں دوستوں کی بزم میں آتے نہیں ہو تم

शायर: Taj Muhammad Siddiqui5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

क्यों दोस्तों की बज़्म में आते नहीं हो तुम
अब दोस्ती का हाथ बढ़ाते नहीं हो तुम

अब ख़्वाब में भी मुझ को सताते नहीं हो तुम
क्यों दिल ये पहले जैसा दुखाते नहीं हो तुम

हर दम उदास रहते हो क्या बात हो गई
मुज़्दा कोई ख़ुशी का सुनाते नहीं हो तुम

क्यों थम गया है दोस्त मोहब्बत का कारवाँ
अब महफ़िलें अदब की सजाते नहीं हो तुम

हम को तुम्हारी बात पे कैसे यक़ीन हो
सुनते हैं अपना 'अह्द निभाते नहीं हो तुम