उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hum na bhulenge kabhi bhi aap ka ehsan ye

हम न भूलेंगे कभी भी आप का एहसान ये

ہم نہ بھولیں گے کبھی بھی آپ کا احسان یہ

शायर: Taj Muhammad Siddiqui6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हम न भूलेंगे कभी भी आप का एहसान ये
वार देंगे आप पर सौ बार अपनी जान ये

तुम से पहले लग रही थी यार मुश्किल ज़िंदगी
मिल के तुम से हो गई है ज़िंदगी आसान ये

साथ तुम जब तक थे मेरे ज़िंदगी गुलज़ार थी
ज़िंदगी तो है वही पर कितनी है सुनसान ये

आज तक समझा नहीं मैं चंद ख़ुशियों के लिए
ठोकरें खाता रहेगा कब तलक इंसान ये

'उम्र-भर न ख़त्म होंगी आदमी की ख़्वाहिशें
'उम्र-भर रहने न देंगे चैन से अरमान ये

लोग जानेंगे मियाँ मुझ को मिरे अश'आर से
देखना इक दिन बनेंगी शा'इरी पहचान ये