उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ye rang gulab ki kali ka

ये रंग गुलाब की कली का

یہ رنگ گلاب کی کلی کا

शायर: Jaleel Manikpuri9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ये रंग गुलाब की कली का
नक़्शा है किस की कम-सिनी का

बुलबुल की बहार में न पूछो
मुँह चूमती है कली कली का

हर वक़्त हैं मौत की दुआएँ
अल्लाह रे लुत्फ़ ज़िंदगी का

ग़ुंचों को सबा ने गुदगुदाया
दुश्वार है ज़ब्त अब हँसी का

समझे थे न हम कि तुम पे मरना
हो जाएगा रोग ज़िंदगी का

हों एक से सब हसीन क्यूँकर
है रंग जुदा कली कली का

मुँह फेर के यूँ चली जवानी
याद आ गया रूठना किसी का

आईना बना रहे हो दिल का
दिल टूट न जाए आरसी का

देखो न 'जलील' को मिटाओ
मिट जाएगा नाम आशिक़ी का