उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ye na samjho kisi kuze mein Thahar jaunga

ये न समझो किसी कूज़े में ठहर जाऊँगा

یہ نہ سمجھو کسی کوزے میں ٹھہر جاؤں گا

शायर: Ibraheem Aatish8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ये न समझो किसी कूज़े में ठहर जाऊँगा
मैं तो दरिया हूँ समुंदर में उतर जाऊँगा

सज्दा-रेज़ी को पुकारेगी ज़मीन-ए-मक़्तल
सर पे दस्तार-ए-जुनूँ ले के जिधर जाऊँगा

सर-निगूँ मौत भी हो जाएगी मेरे आगे
सर-ब-कफ़ कूचा-ए-क़ातिल में अगर जाऊँगा

मैं तो सूरज हूँ अगर तोड़ भी डाला तुम ने
आसमानों में सितारों सा बिखर जाऊँगा

बार-हा तुम न त'अस्सुब से कुरेदो मुझ को
मैं तो जलता हुआ शो'ला हूँ बिफर जाऊँगा

राह अंजान है फैला है अँधेरा हर-सू
तुम से बिछड़ा तो बताओ मैं किधर जाऊँगा

छोड़ कर ज़ीस्त की हर एक ख़ुशी सारे ग़म
तेरी दुनिया से किसी रोज़ गुज़र जाऊँगा

आतिश-ए-वक़्त ने पाला है बड़े नाज़ों से
ये न समझो किसी तूफ़ान से डर जाऊँगा