उर्दू शायरी · ग़ज़ल

itna dimagh par hai asar haal-e-zar ka

इतना दिमाग़ पर है असर हाल-ए-ज़ार का

اتنا دماغ پر ہے اثر حال زار کا

शायर: Ibraheem Aatish7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

इतना दिमाग़ पर है असर हाल-ए-ज़ार का
क़िस्सा बयाँ हुआ न दिल-ए-दाग़-दार का

तौसीफ़ कब हुई है किसी बे-शुऊर की
करता है एहतिराम जहाँ होश्यार का

क्यूँ डगमगा रहे हैं क़दम राह-ए-ज़ीस्त में
क्या आप को ख़याल है अपने वक़ार का

उड़ती है रेत आग का तूफ़ाँ लिए हुए
नक़्शा बदल सका न कोई रेग-ज़ार का

गर हो सके तो और 'अता कीजिए नुमूद
रुत्बा घटाइए न किसी नाम-दार का

छूने लगा है चाँद सितारों की सरहदें
कितनी बुलंदियों पे है रुत्बा ग़ुबार का

'आतिश' वफ़ा-परस्त नहीं होते सर-निगूँ
सारे जहाँ में ज़िक्र है उन के वक़ार का