उर्दू शायरी · ग़ज़ल

buland hun main kahan auj-e-asman ki tarah

बुलंद हूँ मैं कहाँ औज-ए-आसमाँ की तरह

بلند ہوں میں کہاں اوج آسماں کی طرح

शायर: Ibraheem Aatish7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बुलंद हूँ मैं कहाँ औज-ए-आसमाँ की तरह
मिरा वुजूद है बस ख़ाक-ए-ना-तवाँ की तरह

मिरे सफ़र की न रूदाद पूछिए मुझ से
मैं राह-ए-शौक़ में हूँ गर्द-ए-कारवाँ की तरह

मैं कैसे नाज़ करूँ अपने आप पर लोगो
है ज़िंदगी मिरी टूटी हुई कमाँ की तरह

ये कैसा दौर मिरे सामने चला आया
बहार भी है यहाँ मौसम-ए-ख़िज़ाँ की तरह

पढ़ा तो अश्क से लबरेज़ हो गईं आँखें
है दास्तान तिरी मेरी दास्ताँ की तरह

किसी दवा से मिटा है न ये मिटेगा कभी
है दर्द-ए-'इश्क़ मिरे दिल में मेहरबाँ की तरह

मैं अपनी जान भी दे कर कहूँगा ऐ 'आतिश'
मुझे न प्यार मिलेगा कभी यहाँ की तरह