उर्दू शायरी · ग़ज़ल

bhar do jahan mein apni wafaon ki aab-o-tab

भर दो जहाँ में अपनी वफ़ाओं की आब-ओ-ताब

بھر دو جہاں میں اپنی وفاؤں کی آب و تاب

शायर: Ibraheem Aatish7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

भर दो जहाँ में अपनी वफ़ाओं की आब-ओ-ताब
मिट जाए ता-कि नक़ली ख़ुदाओं की आब-ओ-ताब

दिल को अगर बना लें मोहब्बत का आइना
मिट जाएगी जहाँ से जफ़ाओं की आब-ओ-ताब

हम लोग भूल जाएँ अगर अपने इख़्तिलाफ़
होगी जहाँ से ख़त्म बलाओं की आब-ओ-ताब

रखना है गर रवाँ-दवाँ इंसान का दिमाग़
क़ाएम रहे हमेशा सदाओं की आब-ओ-ताब

ये है तबीब-ए-वक़्त का इस दौर में कमाल
है सूद-मंद आज दवाओं की आब-ओ-ताब

ताबिंदा ये रही है रहेगी तमाम 'उम्र
मा'दूम कब रही है दु'आओं की आब-ओ-ताब

अब फ़र्द-ए-सादा-लौह का जीना मुहाल है
'आतिश' 'उरूज पर है अदाओं की आब-ओ-ताब