उर्दू शायरी · ग़ज़ल

baras raha hai jo pani siyah ghaTaon se

बरस रहा है जो पानी सियह घटाओं से

برس رہا ہے جو پانی سیہ گھٹاؤں سے

शायर: Ibraheem Aatish6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बरस रहा है जो पानी सियह घटाओं से
बचाया उस ने ही तपती हुई फ़ज़ाओं से

ये फ़े'ल आप को ले जाएगा बुलंदी पर
'अदू को दोस्त बना लीजिए वफ़ाओं से

ख़ुदा ख़ुदा है करेगा मदद यक़ीनन वो
बस आप ख़ौफ़ न खाएँ कभी बलाओं से

कोई ख़ुदा नहीं आदम है ख़ाक का पुतला
कहाँ बचा है कोई आदमी ख़ताओं से

जो कर रहे हैं ग़रीबों पे ज़ुल्म-ओ-जौर-ओ-सितम
ख़ुदा बचाए उन्हें उन की बद-दु'आओं से

रहीं जो कोशिशें जारी तो देखना 'आतिश'
नया जहान मिलेगा उन्हीं ख़लाओं से