उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ye mujh mein jo be-intiha tanhai hai

ये मुझ में जो बे-इंतिहा तन्हाई है

یہ مجھ میں جو بے انتہا تنہائی ہے

शायर: Yahya Khan Yusuf Zai6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ये मुझ में जो बे-इंतिहा तन्हाई है
इस दश्त की आब-ओ-हवा तन्हाई है

मैं दर्द के नग़्मे सुनाऊँगा तुम्हें
तुम जान लेना मुद्दआ' तन्हाई है

मुझ तक पहुँचने को है इक राह-ए-अमल
और जान लो वो रास्ता तन्हाई है

जो भीड़ में चेहरे कहीं गुम हो गए
उन से मिरा अब राब्ता तन्हाई है

मैं उस मक़ाम-ए-ज़ात तक लाया गया
हर इब्तिदा हर इंतिहा तन्हाई है

जिस को यहाँ पर कामयाबी मिल गई
उस की सज़ा तन्हाई या तन्हाई है