उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dard ke samne daulat nahin dekhi jati

दर्द के सामने दौलत नहीं देखी जाती

درد کے سامنے دولت نہیں دیکھی جاتی

शायर: Yahya Khan Yusuf Zai5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दर्द के सामने दौलत नहीं देखी जाती
जंग में सिर्फ़ ग़नीमत नहीं देखी जाती

सर में सौदा हो तो फ़ुर्सत नहीं देखी जाती
दिल के कामों में सुहूलत नहीं देखी जाती

नक़्द-ए-जाँ बेच दी हम ने तिरे वा'दे के एवज़
माल अच्छा हो तो क़ीमत नहीं देखी जाती

सोचना मत कभी अंजाम सर-ए-राह-ए-तलब
दामन-ए-तेग़ पे क़िस्मत नहीं देखी जाती

हम से चुप रहने की बिल-फ़र्ज़ ख़ता हो भी जाए
दामन-ए-हर्फ़ पे तोहमत नहीं देखी जाती