उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aasman aatish-e-zulmat mein jal jae to

आसमाँ आतिश-ए-ज़ुल्मात में जल जाए तो

آسماں آتش ظلمات میں جل جائے تو

शायर: Yahya Khan Yusuf Zai5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

आसमाँ आतिश-ए-ज़ुल्मात में जल जाए तो
ख़ंदा-ए-सुब्ह की तस्वीर बदल जाए तो

अब तो आराम क़यामत पे हुआ है मौक़ूफ़
और ये आख़िरी उम्मीद भी टल जाए तो

अक्स आईने में और अक्स में रूप उस का है
कभी ये आइना आँखों से बदल जाए तो

ये जो दम साध के बैठे हैं उसे देखने को
पत्थरों की भी कहीं आह निकल जाए तो

हम से आवारा-ए-ग़ुर्बत से मोहब्बत न करो
क्या हो जो रेत ये मुट्ठी से निकल जाए तो