उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aur phir chehra-e-KHashak badal jaega

और फिर चेहरा-ए-ख़ाशाक बदल जाएगा

اور پھر چہرۂ خاشاک بدل جائے گا

शायर: Yahya Khan Yusuf Zai4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

और फिर चेहरा-ए-ख़ाशाक बदल जाएगा
एक दिन मौसम-ए-सफ़्फ़ाक बदल जाएगा

जब ये हंगाम-ए-ख़ुश-इदराक बदल जाएगा
आप का पैरहन-ए-ख़ाक बदल जाएगा

कोई बे-दाग़ क़बा-पोश है क़ातिल अपना
क़त्ल कर लेगा तो पोशाक बदल जाएगा

दाम-ए-उम्मीद में बाँधेगा तमन्ना-ए-ख़ाम
वक़्त आने पे वो चालाक बदल जाएगा