उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ye mere ghar ke tin chaar daraKHt

ये मिरे घर के तीन चार दरख़्त

یہ مرے گھر کے تین چار درخت

शायर: Ikram Arfi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ये मिरे घर के तीन चार दरख़्त
हैं दिसावर के तीन चार दरख़्त

फिर हवा शाख़ शाख़ से लिपटी
आश्ना कर के तीन चार दरख़्त

जैसे काग़ज़ की एक दो कलियाँ
जैसे पत्थर के तीन चार दरख़्त

दश्त दरपेश है सो चलता हूँ
आँख में भर के तीन चार दरख़्त

शाह ने बाग़ में उगाए हैं
संग-ए-मरमर के तीन चार दरख़्त

दश्त-ए-दिल इस क़दर फला-फूला
देखे मर मर के तीन चार दरख़्त

आख़िरी वक़्त बस हवाएँ थीं
और सनोबर के तीन चार दरख़्त