उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hum jaison ka KHayal kisi ne nahin kiya

हम जैसों का ख़याल किसी ने नहीं किया

ہم جیسوں کا خیال کسی نے نہیں کیا

शायर: Ikram Arfi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हम जैसों का ख़याल किसी ने नहीं किया
इस बात का मलाल किसी ने नहीं किया

होती रही हैं जिन की तरफ़ से 'इनायतें
दरवेश को निहाल किसी ने नहीं किया

सब लोग मुंतज़िर हैं कि दरवाज़ा कुछ कहे
दीवार से सवाल किसी ने नहीं किया

तस्ख़ीर तो किया है किसी के जमाल ने
पाबंद-ए-ख़द्द-ओ-ख़ाल किसी ने नहीं किया

बे-मिस्ल की मिसाल अगर दी तो हम ने दी
ये कार-ए-बे-मिसाल किसी ने नहीं किया

चारा-गरान-ए-ज़ख़्म को फिर भी मिरा सलाम
हालाँकि इंदिमाल किसी ने नहीं किया

'इकराम' शाम-ए-हिज्र गुज़रने के बावजूद
शर्मिंदा-ए-विसाल किसी ने नहीं किया