उर्दू शायरी · ग़ज़ल

main pareshan hun nae ghar se

मैं परेशान हूँ नए घर से

میں پریشان ہوں نئے گھر سے

शायर: Ikram Arfi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मैं परेशान हूँ नए घर से
सारे दरवाज़े लगते हैं सर से

क़र्तबा तो बना नहीं सकता
दिल बनाता हूँ संग-ए-मरमर से

जो गरजते हैं वो बरसते नहीं
जो गरजते थे आज वो बरसे

मुख़्तसर ये कि ख़ानमाँ-बर्बाद
बिस्तरों में क़ियाम को तरसे

मैं ने तोता बदल लिया 'इकराम'
सुरमई रंग के कबूतर से